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भारत के राष्ट्रपति

भारत के राष्ट्रपति 👉🏻 सर्व प्रथम राष्ट्रपति -डां राजेन्द्र प्रसाद,(26 JAN 1950 to 13 MAY 1962) 👉🏻 दूसरा - डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन,( 13 MAY 1962 to 13 MAY 1967) 👉🏻 तीसरा-डाॅ जाकिर हुसैन,(13 MAY 1967 to 3 MAY 1969) 👉🏻 चौथा-वराहगिरी वेंकट गिरि,(24 AUG 1969 to 24 AUG 1974) 👉🏻 पाॅचवां-डाॅ फखरुद्दीन अली अहमद,(24 AUG 1974 to 11 FEB 1977) 👉🏻 छठा- नीलम संजीव रेड्डी,(25 JULY 1977 to 25 JULY 1982) 👉🏻 साॅतवाॅ - ज्ञानी जैल सिंह,(25 JULY 1982 to 25 JULY 1987) 👉🏻 आठवाॅ - आर वैंकटरमण ,(25 JULY 1987 to 25 JULY 1992) 👉🏻 नंवा- डाॅ शंकर दयाल शर्मा,(25 JULY 1992 to 25 JULY 1997) 👉🏻 दसवाॅ- के आर नारायणन,(25 JULY 1997 to 25 JULY 2002) 👉🏻 ग्यारवा- एपीजे अब्दुल कलाम,(25 JULY 2002 to 25 JULY 2007) 👉🏻 बांरवा- प्रतीभा पाटिल,(25 JULY 2007 to 25 JULY 2012) 👉🏻 तेरवीं- प्रणव मुखर्जी,(25 JULY 2012 to 25 JULY 2017) 👉🏻 चौदवीं- रामनाथ कोविन्द(25 JULY 2017 to अब तक)

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्‍ट्रपति द्वारा होती है। उसको पद से हटाने की प्रक्रिया और कारण सर्वोच्‍च न्‍यायालय के संबंध में लागू प्रक्रिया के समान ही है। जब वह अपने पद में नहीं रहता तो वह केंद्र या राज्‍य सरकार के अधीन और कोई पद धारण करने का पात्र नहीं होता है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की सलाह से राष्‍ट्रपति केंद्र और राज्‍यों की लेखाओं को रखे जाने के लिए प्रपत्र निर्धारित करता है। केंद्र और राज्‍यों से संबंधित की उसकी लेखा संबंधी रिपोर्टें राष्‍ट्रपति और संबंधित राज्‍यपालों को भेजी जाती है जिन्‍हें संसद और राज्‍य विधायिका के समक्ष रखा जाता है। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायतें कार्मिक लोक शिकायतें और पेंशन मंत्रालय में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, प्रशा‍सनिक सुधारों तथा विशेष रूप से केंद्रीय सरकार के संगठनों एवं सामान्‍य तौर पर राज्‍य तथा संघ राज्‍य क्षेत्र के प्रशासन से संबंधित लोक शिकायतों के समाधान के लिए सरकार की नोडल एजेंसी है। यह विभाग केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों के लिए प्रबंधन परामर्शी सेवाओं की व्‍यवस्‍था कर...

सरकार के मंत्रालय/विभाग

Indian Politics सरकार के मंत्रालय/विभाग सरकार में अनेक मंत्रालय/विभाग है। इनकी संख्‍या और प्रकार समय समय पर कारकों के अनुसार बदलते रहते हैं जैसे कि कार्य का परिमाण, विशिष्‍ट मदों के साथ जुड़े महत्‍व, अभिविन्‍यास में परिवर्तन, राजनैतिक शीघ्रता आदि। केन्‍द्र में मंत्रालयों की संख्‍या 15 अगस्‍त 1947 को 18 थी। मंत्रालयों/विभागों की सूची (30.9.2006 के अनुसार) कृषि मंत्रालय कृषि और विभाग कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग पशुपालन, डेयरी और मत्‍स्‍य योजना विभाग रसायन और उर्वरक मंत्रालय रसायन और पेट्रो - रासायन विभाग उर्वरक विभाग नागर विमान मंत्रालय कोयला मंत्रालय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय वाणिज्‍य विभाग औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय दूरसंचार विभाग डाक विभाग इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग उपभोक्‍ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय उपभोक्‍ता मामले विभाग खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग नैगम कार्य मंत्रालय संस्‍कृति मंत्रालय रक्षा मंत्रालय रक्षा विभाग रक्षा उत्‍पादन और आपूर्ति विभाग रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग पूर्वोत्तर क्षेत...

Indian Politics

Indian Politics मुस्लिम लीग मुस्लिम लीग का मूल नाम 'अखिल भारतीय मुस्लिम लीग' था। यह एक राजनीतिक समूह था, जिसने ब्रिटिश भारत के विभाजन (1947 ई.) से निर्मित एक अलग मुस्लिम राष्ट्र के लिए आन्दोलन चलाया। मुस्लिम नेताओं, विशेषकर मुहम्मद अली जिन्ना ने इस बात का भय जताया कि स्वतंत्र होने पर भारत में सिर्फ़ हिन्दुओं का ही वर्चस्व रहेगा। इसीलिए उन्होंने मुस्लिमों के लिए अलग से एक राष्ट्र की मांग को बार-बार दुहराया। लीग की स्थापना 1 अक्टूबर, 1906 ई. को एच.एच. आगा ख़ाँ के नेतृत्व में मुस्लिमों का एक दल वायसराय लॉर्ड मिण्टो से शिमला में मिला। अलीगढ़ कॉलेज के प्रिंसपल आर्चबोल्ड इस प्रतिनिधिमण्डल के जनक थे। इस प्रतिनिधिमण्डल ने वायसराय से अनुरोध किया कि प्रान्तीय, केन्द्रीय व स्थानीय निर्वाचन हेतु मुस्लिमों के लिए पृथक साम्प्रादायिक निर्वाचन की व्यवस्था की जाय। इस शिष्टमण्डल को भेजने के पीछे अंग्रेज़ उच्च अधिकारियों का हाथ था। मिण्टो ने इनकी मांगो का पूर्ण समर्थन किया। जिसके फलस्वरूप मुस्लिम नेताओं ने ढाका के नवाब सलीमुल्ला के नेतृत्व में 30 दिसम्बर, 1906 ई. को ढाका में 'मुस्लिम ...

मुहम्मद बिन तुगलक

मुहम्मद बिन तुगलक ⌚मुहम्मद बिन तुगलक का मूल नाम जौन खाँ था इसने उलूग खाँ की उपाधि धारण की यह गयासुद्दीन तुगलक का पुत्र था ⌚मुहम्मद बिन तुगलक का नाम कई संज्ञाओं से जोडा गया जैसे ”अंतर्विरोधों का विस्मयकारी मिश्रण” “रक्त का प्यासा व परोपकारी” आदि ⌚मुहम्मद बिन तुगलक का शासन काल (1325 से 1351 तक) चला ⌚दिल्ली सल्तनत के विद्वानो मे मुहम्मद बिन तुगलक सबसे विलक्ष्ण वाला व्यक्ति था राज मुंदरी अभिलेखों में उसे दुनिया का खान कहा गया ⌚यह अरबी फारसी का महान विद्वान तथा ज्ञान विज्ञान व विभिन्न विधाओ में जैसे खगोलशास्त्र, दर्शन, गणित, चिकित्सा, तर्कशास्त्र आदि में पारंगत था ⌚मोहम्मद बिन तुगलक को पागलो का बादशाह व इस्लामी जगत का सबसे अधिक विद्वान मूर्ख कहा जाता था ⌚एलफिस्टन के अनुसार मुहम्म्द बिन तुगलक में पागलपन का कुछ अंश था ⌚डा0 आशीर्वाद लाल श्रीवास्तव के अनुसार इसमे विरोधी तत्वो का मिश्रण था ⌚डा0 ईश्वर प्रसाद कहते है दिल्ली के सिहासन को सुशोभित करने वाले शासको में वह सर्वाधिक विद्वान व सुसंस्कृत शासक था ⌚ये पहला ऐसा शासक था जो अजमेर में शेख मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर और ब...

वर्षा ऋतु (Rainy)

वर्षा ऋतु (Rainy) * यह ऋतु 5 जून से 25 सितंबर तक माना जाता है * इस समय जब सूर्य कर्क रेखा पर चमकता है तो वायुमंडल की अवस्थाओं में बड़ा परिवर्तन हो जाता है * इस समय वायुदाब 992 से 996 मिलीबार तक गिर जाता है * दक्षिणी गोलार्ध की दक्षिणी पूर्वी सन्मार्गी पवनें निम्न वायुदाब के केंद्र तक आने का प्रयास करती हैं * जो ही ये पवन विषुवत रेखा को पार करती है, फैरल के नियमानुसार इनकी प्रवाह दिशा परिवर्तित हो जाती है और दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूरब की ओर चलने लगती है भारत में इसे दक्षिणी पश्चिमी मानसून के नाम से जाना जाता है * जब संपूर्ण देश में मानसूनी वर्षा होने लगती है तब तापमान कम होने लगता है * जून जुलाई माह में उत्तरी पश्चिमी मरुस्थल को छोड़कर संपूर्ण देश में तापमान समान हो जाता है * बीच-बीच में लंबे समय तक वर्षा ना होने पर तापमान में वृद्धि होने लगती है * तापमान के गिर जाने पर वायु में आद्रता बढ़ जाती है जिसके कारण रात्रि में कोहरा एवं ओस गिरने लगता है जिसके फलस्वरूप प्रातः कालीन तापमान काफी कम पाया जाता है * सितंबर माह में अरावली के पश्चिम में अधिकतम तापमान 38° सेंटीग्रेड तक अंकित किए जा...

प्राचीन भारत के वैज्ञानिक

प्राचीन भारत के वैज्ञानिक आप यह जान कर आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि कई वर्षों पहले कई प्रकार की वैज्ञानिक जानकारियों की खोज प्राचीन भारत में हुई थी। इस अवधि के दौरान विज्ञान और गणित बहुत अधिक विकसित थे एवं प्राचीन भारतीयों ने इस क्षेत्र में बहुत योगदान दिया था। चिकित्सा की देसी प्रणाली आयुर्वेद थी जो प्राचीन काल में विकसित हुई थी। यहाँ तक कि योग को आयुर्वेद के संबद्ध विज्ञान के रूप में विकसित किया गया  था। इस लेख में हम प्राचीन भारत के कुछ वैज्ञानिकों के योगदानों के बारे में जानेंगे। प्राचीन भारत के वैज्ञानिक 1. आर्यभट्ट • ये पांचवीं सदी के गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, ज्योतिषी और भौतिक विज्ञानी थे। • 23 वर्ष की उम्र में, इन्होंने आर्यभट्टिया (Aryabhattiya) की रचना की, जो उनके समय के गणित का सार है। • सबसे पहली बार उन्होंने ही पाई ( pi) का मान 3.1416 निकाला था। • इन्होंने बताया कि शून्य केवल अंक नहीं बल्कि एक प्रतीक और अवधारणा है। वास्तव में शून्य के आविष्कार ने आर्यभट्ट को पृथ्वी और चंद्रमा के बीच सटीक दूरी पता लगाने में सक्षम बनाया था और शून्य की खोज से नकारात्मक अंकों के नए आय...

कीट विज्ञान

कीट विज्ञान यह विज्ञान, जंतु विज्ञान या प्राणिविज्ञान का वह अंग है जिसके अंतर्गत कीटों अथवा षट्पादों का अध्ययन आता है। षट्पाद (षट्=छह, पाद=पैर) श्रेणी को ही कभी-कभी कीट की संज्ञा दी जाती हैं। जंतु जगत में 20 संघ है जिनमे आर्थोपोडा सबसे बड़ा है जिनका शरीर क्रमश: सिर, वृक्ष और उदर में विभक्त होता है| सामान्य तौर पर इस संघ के कीटों में तीन जोड़ा पैर और पंख पाये जाते हैं | पृथ्वी पर पाये जाने वाले सजीवों में आधे से अधिक कीट हैं| ऐसा अनुमान लगाया गया है कि कीट वर्ग के 3 करोड़ प्राणी ऐसे हैं जिनको अभी तक चिन्हित ही नहीं किया जा सका है अतः इस ग्रह पर जीवन के विभिन्न रूपों में कीट वर्ग का योगदान 90% है| कीट पृथ्वी पर सभी वातावरणों में पाए जाते हैं। सिर्फ समुद्रों में इनकी संख्या कुछ कम है। भारत में पायी जाने वाली मृदाएं कीटों से सम्बंधित तथ्य निम्न हैं: 1. कीट, आर्थोपोडा संघ का जीव होता है जिसका विकास एनीलिडा संघ से हुआ है | 2. कीटों के ऊपर काईटिन का बना बाह्य कंकाल और उत्सर्जन के लिए कोक्सा ग्रंथियां व मैलपीगी नलिका पायी जाती है | 3. कीट के रक्त में R.B.C. नहीं पायी जाती है जिससे इसक...