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Showing posts from June, 2019

भारत के राष्ट्रपति

भारत के राष्ट्रपति 👉🏻 सर्व प्रथम राष्ट्रपति -डां राजेन्द्र प्रसाद,(26 JAN 1950 to 13 MAY 1962) 👉🏻 दूसरा - डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन,( 13 MAY 1962 to 13 MAY 1967) 👉🏻 तीसरा-डाॅ जाकिर हुसैन,(13 MAY 1967 to 3 MAY 1969) 👉🏻 चौथा-वराहगिरी वेंकट गिरि,(24 AUG 1969 to 24 AUG 1974) 👉🏻 पाॅचवां-डाॅ फखरुद्दीन अली अहमद,(24 AUG 1974 to 11 FEB 1977) 👉🏻 छठा- नीलम संजीव रेड्डी,(25 JULY 1977 to 25 JULY 1982) 👉🏻 साॅतवाॅ - ज्ञानी जैल सिंह,(25 JULY 1982 to 25 JULY 1987) 👉🏻 आठवाॅ - आर वैंकटरमण ,(25 JULY 1987 to 25 JULY 1992) 👉🏻 नंवा- डाॅ शंकर दयाल शर्मा,(25 JULY 1992 to 25 JULY 1997) 👉🏻 दसवाॅ- के आर नारायणन,(25 JULY 1997 to 25 JULY 2002) 👉🏻 ग्यारवा- एपीजे अब्दुल कलाम,(25 JULY 2002 to 25 JULY 2007) 👉🏻 बांरवा- प्रतीभा पाटिल,(25 JULY 2007 to 25 JULY 2012) 👉🏻 तेरवीं- प्रणव मुखर्जी,(25 JULY 2012 to 25 JULY 2017) 👉🏻 चौदवीं- रामनाथ कोविन्द(25 JULY 2017 to अब तक)

प्राचीन भारत के वैज्ञानिक

प्राचीन भारत के वैज्ञानिक आप यह जान कर आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि कई वर्षों पहले कई प्रकार की वैज्ञानिक जानकारियों की खोज प्राचीन भारत में हुई थी। इस अवधि के दौरान विज्ञान और गणित बहुत अधिक विकसित थे एवं प्राचीन भारतीयों ने इस क्षेत्र में बहुत योगदान दिया था। चिकित्सा की देसी प्रणाली आयुर्वेद थी जो प्राचीन काल में विकसित हुई थी। यहाँ तक कि योग को आयुर्वेद के संबद्ध विज्ञान के रूप में विकसित किया गया  था। इस लेख में हम प्राचीन भारत के कुछ वैज्ञानिकों के योगदानों के बारे में जानेंगे। प्राचीन भारत के वैज्ञानिक 1. आर्यभट्ट • ये पांचवीं सदी के गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, ज्योतिषी और भौतिक विज्ञानी थे। • 23 वर्ष की उम्र में, इन्होंने आर्यभट्टिया (Aryabhattiya) की रचना की, जो उनके समय के गणित का सार है। • सबसे पहली बार उन्होंने ही पाई ( pi) का मान 3.1416 निकाला था। • इन्होंने बताया कि शून्य केवल अंक नहीं बल्कि एक प्रतीक और अवधारणा है। वास्तव में शून्य के आविष्कार ने आर्यभट्ट को पृथ्वी और चंद्रमा के बीच सटीक दूरी पता लगाने में सक्षम बनाया था और शून्य की खोज से नकारात्मक अंकों के नए आय...

कीट विज्ञान

कीट विज्ञान यह विज्ञान, जंतु विज्ञान या प्राणिविज्ञान का वह अंग है जिसके अंतर्गत कीटों अथवा षट्पादों का अध्ययन आता है। षट्पाद (षट्=छह, पाद=पैर) श्रेणी को ही कभी-कभी कीट की संज्ञा दी जाती हैं। जंतु जगत में 20 संघ है जिनमे आर्थोपोडा सबसे बड़ा है जिनका शरीर क्रमश: सिर, वृक्ष और उदर में विभक्त होता है| सामान्य तौर पर इस संघ के कीटों में तीन जोड़ा पैर और पंख पाये जाते हैं | पृथ्वी पर पाये जाने वाले सजीवों में आधे से अधिक कीट हैं| ऐसा अनुमान लगाया गया है कि कीट वर्ग के 3 करोड़ प्राणी ऐसे हैं जिनको अभी तक चिन्हित ही नहीं किया जा सका है अतः इस ग्रह पर जीवन के विभिन्न रूपों में कीट वर्ग का योगदान 90% है| कीट पृथ्वी पर सभी वातावरणों में पाए जाते हैं। सिर्फ समुद्रों में इनकी संख्या कुछ कम है। भारत में पायी जाने वाली मृदाएं कीटों से सम्बंधित तथ्य निम्न हैं: 1. कीट, आर्थोपोडा संघ का जीव होता है जिसका विकास एनीलिडा संघ से हुआ है | 2. कीटों के ऊपर काईटिन का बना बाह्य कंकाल और उत्सर्जन के लिए कोक्सा ग्रंथियां व मैलपीगी नलिका पायी जाती है | 3. कीट के रक्त में R.B.C. नहीं पायी जाती है जिससे इसक...

विज्ञान के रोचक तथ्य

विज्ञान के रोचक तथ्य हम सभी जानते हैं कि विज्ञान एक बौद्धिक और व्यावहारिक गतिविधि है जिसके अंतर्गत हम अवलोकन और प्रयोग के माध्यम से अपने चारों ओर के भौतिक और प्राकृतिक दुनिया की संरचना और कार्यप्रणाली का अध्ययन करते हैं| कभी कभी हम विभिन्न विचारों और सोच में फँस जाते हैं और अपने मन को इस उलझन की स्थिति से निकालने के लिए हमें कुछ अलग सोचने की जरूरत होती है। विज्ञान के बारे में निम्नलिखित आश्चर्यजनक तथ्य आपको सोचने पर मजबूर करेंगे कि विज्ञान वह नहीं है जिसे केवल हमने किताबों में पढ़ा है| वास्तव में ये तथ्य विज्ञान के प्रति आपकी रूचि में और भी बढ़ोतरी करेंगें| जानें विज्ञान से संबंधित रोचक तथ्य | 1. क्या आप जानते हैं कि औसत जीवनकाल के दौरान दिल लगभग 15 लाख बैरल रक्त पंप करता है जो 200 तेल केट्रेन टैंकरों को भरने के लिए पर्याप्त है? 2. क्या आपको पता है कि बारिश की एक इंच का आयतन बर्फ की 10 इंच के बराबर होता है? लगभग 30 डिग्री तापमान पर जब 1 इंच पानी वाष्पीकृत होती है तो उससे 10 इंच बर्फ बनती है| 3. क्या आप जानते हैं कि “हीलियम सुपरफ्लूइड” किसी पात्र में ऊपर चढ़ने के बाद गुरुत्वाकर्...

मानव का उत्सर्जन तंत्र का कार्य

मानव का उत्सर्जन तंत्र का कार्य  किसी जीव के शरीर से विषाक्त अपशिष्ट (Toxic Wastes) को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन (Excretion) कहलाती है। कार्बन डाईऑक्साइड और यूरिया मानव शरीर द्वारा उत्सर्जित किए जाने वाले प्रमुख अपशिष्ट है। कार्बन डाईऑक्साइड श्वसन की प्रक्रिया से पैदा होता है और यूरिया यकृत (लीवर) में अप्रयुक्त प्रोटीनों के अपघटन से बनता है। मानव शरीर से इन्हें बाहर निकालना अनिवार्य है, क्योंकि इनका मानव शरीर में संचित होना जहरीला होता है और ये उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। शरीर से अपशिष्ट बाहर निकालने के लिए अलग–अलग अंग होते हैं। ये अंग हैं–फेफड़े (lungs) और वृक्क (kidney)। हमारे फेफड़े (lungs) कार्बन डाईऑक्साइड का और वृक्क (kidney) यूरिया का उत्सर्जन करते हैं। इसलिए वृक्क (kidney) मानव शरीर का मुख्य उत्सर्जक अंग है| सबसे पहले हम देखेंगे कि फेफड़ों से किस प्रकार कार्बन डाईऑक्साइड बाहर निकाला जाता है| श्वसन की प्रक्रिया के दौरान भोजन के ऑक्सीकरण द्वारा शरीर में अपशिष्ट पदार्थ के रूप में कार्बन डाईऑक्साइ बनता है। प्रसरण (Diffusion) के द्वारा यह कार्बन डाईऑक्साइड शरीर...

प्रमुख सौर मिशनों का संक्षिप्त परिचय

प्रमुख सौर मिशनों का संक्षिप्त परिचय   सूर्य एक चमकीला खगोलीय पिण्ड है जिसके चारों तरफ पृथ्वी और अन्य ग्रह परिक्रमा करते हैं। सूर्य से इन ग्रहों को ताप और प्रकाश मिलती है। इसलिए, यह सौर प्रणाली का केंद्रीय तारा है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम से बना है। पृथ्वी से इसकी दूरी करीब 93,000,000 मील या 150,000,000 किमी है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान की तुलना में 332,000 गुना अधिक है। सूर्य के उच्च रेजलूशन और करीबी– दृश्य एवं उसके आंतरिक हेलिओस्फियर (हमारी सौर प्रणाली के सबसे भीतर का क्षेत्र) का अध्ययन करने एवं इस विशालकाय तारे जिस पर हमारा जीवन निर्भर है, के अशांत व्यवहार को और अधिक अच्छे से समझने के लिए वेधशालाओं द्वारा कई सौर मिशन शुरु किए गए। अब तक के विभिन्न सौर मिशन इस प्रकार हैं: 1. वर्ष 1959 और 1968 के बीच सूर्य पर अध्ययन करने के लिए नासा द्वारा पायनीयर 5,6,7,8 और 9 उपग्रह भेजा गया था। इन उपग्रहों ने सौर पवन और सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र की पहली विस्तृत माप दी थी। इस बात की जांच के लिए ये उपग्रह सूर्य से उतनी ही दूरी पर परिक्रमा कर रहे थे जितनी दूरी पर पृथ्वी स...

भिन्न प्रकार के रोग एवं लक्षण

भिन्न प्रकार के रोग एवं लक्षण   डिजीज (रोग) का शाब्दिक अर्थ है अ–स्वस्थ अर्थात सहज नहीं होना| दूसरे शब्दों में कहें तो शरीर के अलग– अलग हिस्सों का सही से काम नहीं करना| अनुवांशिक विकार, हार्मोन का असंतुलन, शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली का सही तरीके से काम नहीं करना, कुछ ऐसे कारक हैं जो मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। आंतरिक स्रोतों द्वारा होने वाले रोग जैविक या उपापचयी रोग कहलाते हैं, जैसे– हृदयाघात, गुर्दे का खराब होना, मधुमेह, एलर्जी, कैंसर आदि और बाहरी कारकों द्वारा होने वाले रोगों में क्वाशियोरकोर, मोटापा, रतौंधी, सकर्वी आदि प्रमुख हैं| कुछ रोग असंतुलित आहार की वजह से सूक्ष्म–जीवों जैसे - विषाणु, जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, कृमि, कीड़ों आदि द्वारा भी होते हैं। पर्यावरण प्रदूषक, तंबाकू, शराब और नशीली दवाएं कुछ ऐसे अन्य महत्वपूर्ण बाहरी कारक हैं जो मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। रोगों के प्रकारः प्रकृति, गुण और प्रसार के कारणों के आधार पर रोग दो प्रकार के होते हैं– 1. जन्मजात रोग वैसे रोगों को कहा जाता है जो नवजात शिशु में जन्म के समय से ही विद्यमान होते हैं। य...

मानव कंकाल तंत्र

मानव कंकाल तंत्र  कंकाल तंत्र मानव शरीर को सख्त संरचना या रूपरेखा प्रदान करता है जो शरीर की रक्षा करता है। यह अस्थियों, उपास्थियों, शिरा (टेंडन) और स्नायु/ अस्थिरज्जु (लिगमेंट) जैसे संयोजी ऊतकों से बना है। क्या आप जानते हैं कि यदि कंकाल बिना किसीजोड़ के हो तो किसी प्रकार की गतिविधि नहीं होगी और मानव शरीर एक पत्थर के सिवा कुछ नहीं रह जाएगा? शरीर में मौजूद कंकाल के आधार पर, कंकाल दो प्रकार के होते हैं: 1. बाहरी (एग्जो) कंकाल: शरीर के बाहरी परत में पाए जाने वाले कंकाल को बाहरी कंकाल कहते हैं। ये मूल रूप से अपरिपक्व बाहरी त्वचा (ectoderm) या मध्यजनस्तर (mesoderm) से बनता है। यह भीतरी अंगों की रक्षा और संरक्षण करता है और मृत होता है। जैसे  मछलियों के शल्क, कछुए का बाहरी सख्त परत, पंक्षियों के पंख आदि। 2. आंतरिक (एंडो) कंकाल: यह कंकाल मानव शरीर के भीतर पाया जाता है और यह मध्यजनस्तर (mesoderm) से बनता है। ये लगभग सभी कशेरुकी जंतुओं में पाया जाता है और शरीर की मुख्य संरचना का निर्माण करता है। क्या आप जानते हैंकि ये कंकाल मांसपेशियों से ढंके होते हैं? संरचना के आधार पर आंतरिक ...

भारतीय संविधान सभा से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य और जानकारी

भारतीय संविधान सभा से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य और जानकारी भारत की संविधान सभा का चुनाव भारतीय संविधान की रचना के लिए किया गया था. ग्रेट ब्रिटेन से स्वतंत्र होने के बाद संविधान सभा के सदस्य ही प्रथम संसद के सदस्य बने: (1) कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों के आधार पर भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन जुलाई, 1946 ई० में किया गया. (2) संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 निश्चित की गई थी, जिनमें 292 ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधि, 4 चीफ कमिश्नर क्षेत्रों के प्रतिनिधि एवं 93 देशी रियासतों के प्रतिनिधि थे. (3) मिशन योजना के अनुसार जुलाई, 1946 ई० में संविधान सभा का चुनाव हुआ. कुल 389 सदस्यों में से प्रांतों के लिए निर्धारित 296 सदस्यों के लिय चुनाव हुए. इसमें कांग्रेस को 208, मुस्लिम लीग को 73 स्थान एवं 15 अन्य दलों के तथा स्वतंत्र उम्‍मीदवार निर्वाचित हुए. (4) 9 दिसंबर, 1946 ई० को संविधान सभा की प्रथम बैठक नई दिल्ली स्थित काउंसिल चैम्बर के पुस्तकालय भवन में हुई. सभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्‍यक्ष चुना गया. मुस्लिम लीग ने ब...

भारत में उपलब्ध कुछ प्रमुख मिट्टी समूह हैं:

भारत में उपलब्ध कुछ प्रमुख मिट्टी समूह हैं:  👉1. जलोढ़ मिट्टी 2. काली मिट्टी 3. लाल मिट्टी 4. बाद की और बाद वाली मिट्टी 5. वन और पहाड़ की मिट्टी 6. शुष्क और रेगिस्तानी मिट्टी 7. खारा और क्षारीय मिट्टी 8. चीटी और मार्श मिट्टी! 👉भारत भूविज्ञान, राहत, जलवायु और वनस्पति की विभिन्न स्थितियों के साथ विशाल आयामों का देश है। इसलिए, भारत में मिट्टी के बड़े समूह हैं, जो एक दूसरे से अलग हैं। भारतीय मिट्टी, बकाया भूविज्ञान, राहत, प्रजनन क्षमता, रासायनिक संरचना और भौतिक संरचना आदि को वर्गीकृत करने के लिए विभिन्न मापदंड लागू किए गए हैं। 👉पूर्वोक्त मानदंडों में से किसी एक पर आधारित किसी भी वर्गीकरण का अपना अंतर्निहित दोष है। यहां तक ​​कि सबसे सक्षम पेडोलॉजिस्ट को भारतीय मिट्टी का सटीक, पूर्ण, व्यापक और सामान्यीकृत खाता प्रस्तुत करना मुश्किल होगा। 👉भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान, जिला राजपत्रों और आधिकारिक रिपोर्टों में आकर्षक खातों का एक विशाल निकाय उभरा था। इन खातों को आम तौर पर अंतर मिट्टी की उर्वरता और भूमि राजस्व संग्रह के मूल्यांकन की दिशा में निर्देशित किया गया था, लेकिन देश ...

भारत का भौतिक विभाजन

भारत का भौतिक विभाजन 👉हिमालय पर्वत शृंखला (Himalaya Range) 1.उत्तरी मैदान (Northan Plain) 2.प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Pleatue) 3.भारतीय मरुस्थल (Indian Desert) 4.तटीय मैदान (Coastal Plain) 👉हिमालय पर्वत भौतिक विभाजन 👉भारत की उत्तरी सीमा पर विस्तृत हिमालय भूगर्भीय रूप से युवा एवं बनावट के दृष्टिकोण से वलित पर्वत शृंखला है। ये पर्वत शृंखलाएँ पश्चिम-पूर्व दिशा में सिंधु से लेकर ब्रह्मपुत्रा तक पैफली हैं। हिमालय विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है और एक अत्यधिक असम अवरोधों में से एक है। ये 2400 कि॰मी॰ की लंबाई में फले एक अर्द्धवृत्त का निर्माण करते हैं। इसकी चैड़ाई कश्मीर में 400 Km एवं अरुणाचल में 150 Km है। पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है। अपने पूरे देशांतरीय विस्तार वेफ साथ हिमालय को चार भागों में बाँट सकते हैं। 1.ट्रांस हिमालय (Trans Himalaya) 2.वृहत हिमालय (Great Himalaya) 3.मध्य/लघु हिमालय (Lower Himalaya) 4.शिवालिक हिमालय (Shivalik Himalaya) evrest, makalu, nanda devi, himalaya mountain 👉ट्रांस हिमालय (Trans Himala...

भारत के प्रमुख पठार

    भारत के प्रमुख पठार 👉भारत का प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीयए आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था तथा यही कारण है कि यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं। इस पठार के दो मुख्य भाग हैं- 1.मध्य उच्चभूमि 2.दक्कन का पठार 👉मध्य उच्चभूमि 👉नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो कि मालवा के पठार के अधिकतर भागों पर फैला है उसे मध्य उच्चभूमि के नाम से जाना जाता है। विंध्य शृंखला दक्षिण में मध्य उच्चभूमि तथा उत्तर-पश्चिम में अरावली से घिरी है। पश्चिम में यह धीरे-धीरे राजस्थान के बलुई तथा पथरीले मरुस्थल से मिल जाता है। इस क्षेत्र में बहने वाली नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा तथा केन दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ बहती हैं इस प्रकार वे इस क्षेत्र के ढाल को दर्शाती हैं। मध्य उच्चभूमि पश्चिम में चौड़ी लेकिन पूर्व में संकीर्ण है। इस पठार के पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड तथा बघेलखंड के नाम से जाना जात...