भारत के राष्ट्रपति 👉🏻 सर्व प्रथम राष्ट्रपति -डां राजेन्द्र प्रसाद,(26 JAN 1950 to 13 MAY 1962) 👉🏻 दूसरा - डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन,( 13 MAY 1962 to 13 MAY 1967) 👉🏻 तीसरा-डाॅ जाकिर हुसैन,(13 MAY 1967 to 3 MAY 1969) 👉🏻 चौथा-वराहगिरी वेंकट गिरि,(24 AUG 1969 to 24 AUG 1974) 👉🏻 पाॅचवां-डाॅ फखरुद्दीन अली अहमद,(24 AUG 1974 to 11 FEB 1977) 👉🏻 छठा- नीलम संजीव रेड्डी,(25 JULY 1977 to 25 JULY 1982) 👉🏻 साॅतवाॅ - ज्ञानी जैल सिंह,(25 JULY 1982 to 25 JULY 1987) 👉🏻 आठवाॅ - आर वैंकटरमण ,(25 JULY 1987 to 25 JULY 1992) 👉🏻 नंवा- डाॅ शंकर दयाल शर्मा,(25 JULY 1992 to 25 JULY 1997) 👉🏻 दसवाॅ- के आर नारायणन,(25 JULY 1997 to 25 JULY 2002) 👉🏻 ग्यारवा- एपीजे अब्दुल कलाम,(25 JULY 2002 to 25 JULY 2007) 👉🏻 बांरवा- प्रतीभा पाटिल,(25 JULY 2007 to 25 JULY 2012) 👉🏻 तेरवीं- प्रणव मुखर्जी,(25 JULY 2012 to 25 JULY 2017) 👉🏻 चौदवीं- रामनाथ कोविन्द(25 JULY 2017 to अब तक)
भिन्न प्रकार के रोग एवं लक्षण
डिजीज (रोग) का शाब्दिक अर्थ है अ–स्वस्थ अर्थात सहज नहीं होना| दूसरे शब्दों में कहें तो शरीर के अलग– अलग हिस्सों का सही से काम नहीं करना| अनुवांशिक विकार, हार्मोन का असंतुलन, शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली का सही तरीके से काम नहीं करना, कुछ ऐसे कारक हैं जो मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। आंतरिक स्रोतों द्वारा होने वाले रोग जैविक या उपापचयी रोग कहलाते हैं, जैसे– हृदयाघात, गुर्दे का खराब होना, मधुमेह, एलर्जी, कैंसर आदि और बाहरी कारकों द्वारा होने वाले रोगों में क्वाशियोरकोर, मोटापा, रतौंधी, सकर्वी आदि प्रमुख हैं| कुछ रोग असंतुलित आहार की वजह से सूक्ष्म–जीवों जैसे - विषाणु, जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, कृमि, कीड़ों आदि द्वारा भी होते हैं। पर्यावरण प्रदूषक, तंबाकू, शराब और नशीली दवाएं कुछ ऐसे अन्य महत्वपूर्ण बाहरी कारक हैं जो मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
रोगों के प्रकारः प्रकृति, गुण और प्रसार के कारणों के आधार पर रोग दो प्रकार के होते हैं–
1. जन्मजात रोग वैसे रोगों को कहा जाता है जो नवजात शिशु में जन्म के समय से ही विद्यमान होते हैं। ये रोग आनुवांशिक अनियमितताओं या उपापचयी विकारों या किसी अंग के सही तरीके से काम नहीं करने की वजह से होते हैं। ये मूल रूप से स्थायी रोग हैं जिन्हें आमतौर पर आसानी से दूर नहीं किया जा सकता है, जैसे - आनुवंशिकता के कारण बच्चों में कटे हुए होंठ (हर्लिप), कटे हुए तालु, हाथीपाँव जैसी बीमारियां, गुणसूत्रों में असंतुलन की वजह से मंगोलिज्म जैसी बीमारी, हृदय संबंधी रोग की वजह से बच्चा नीले रंग का पैदा होना आदि इसके कुछ उदाहरण हैं।
2. अर्जित रोग, वैसे रोगों या विकारों को कहते हैं जो जन्मजात नहीं होते लेकिन विभिन्न कारणों और कारकों की वजह से हो जाते हैं। इन्हें निम्नलिखित दो वर्गों में बांटा जा सकता है:
(i) संचायी या संक्रामक रोगः ये रोग कई प्रकार के रोगजनक वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, कवक और कीड़ों की वजह से होते हैं। ये रोगजनक आमतौर पर रोगवाहकों की मदद से एक जगह से दूसरे जगह फैलते हैं।
(ii) गैर–संचारी या गैर–संक्रामक रोग या अपक्षयी रोगः ये रोग मनुष्य के शरीर में कुछ अंगों या अंग प्रणाली के सही तरीके से काम नहीं करने की वजह से होते हैं। इनमे से कई रोग पोषक तत्वों, खनिजों या विटामिनों की कमी से भी होते हैं, जैसे - कैंसर, एलर्जी इत्यादि|
रक्ताधान की वजह से फैलने वाले रोग
एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिसिएंसी सिंड्रोम): इस रोग में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है और यह इम्यूनो डिफिसिएंसी वायरस (एचआईवी) की वजह से होता है। एचआईवी दो प्रकार के होते हैं– HIV-1 और HIV-2. एड्स से संबंधित फिलहाल सबसे आम वायरस HIV-1 है| अफ्रीका के जंगली हरे बंदरों के खून में पाया जाने वाला सिमीयन इम्यूनो डिफिसिएंसी वायरस (एसआईवी) HIV-2 के जैसा ही है। एचआईवी एक रेट्रोवायरस है। यह आरएनए से डीएनए बना सकता है। एचआईवी से प्रभावित होने वाली प्रमुख कोशिका सहायक टी– लिम्फोसाइट है| यह कोशिका सीडी–4 रेसेप्टर के रूप में होती हैं। एचआईवी धीरे– धीरे टी– लिम्फोसाइट्स को नष्ट कर देता है। जिसके कारण मरीज में कभी– कभी लिम्फ नोड्स में हल्का सूजन, लंबे समय तक चलने वाला बुखार, डायरिया या अन्य गैर– विशिष्ट लक्षण दिखाई देते हैं|
एड्स के बारे में महत्वपूर्ण तथ्यः भारत में सबसे पहली बार एड्स का मामला 1986 में पता चला था और उस समय रोग अपने अंतिम चरण में था। एचआईवी एंटीबॉडीज का पता एलिजा(ALISA) टेस्ट (एंजाइम– लिक्ड इम्यूनो सॉर्बेंट ऐसे) से लगाया जा सकता है। दुनिया भर में विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर को मनाया जाता है।
बैक्टीरिया से होने वाले रोग
रोग का नाम रोगाणु का नाम प्रभावित अंग
लक्षण
हैजा बिबियो कोलेरी पाचन तंत्र उल्टी व दस्त, शरीर में ऐंठन एवं डिहाइड्रेशन
टी. बी. माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस फेफड़े खांसी, बुखार, छाती में दर्द, मुँह से रक्त आना
कुकुरखांसी वैसिलम परटूसिस फेफड़ा बार-बार खांसी का आना
न्यूमोनिया डिप्लोकोकस न्यूमोनियाई फेफड़े छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी
ब्रोंकाइटिस जीवाणु श्वसन तंत्र छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी
प्लूरिसी जीवाणु फेफड़े छाती में दर्द, बुखार, सांस लेने में परेशानी
प्लेग पास्चुरेला पेस्टिस लिम्फ गंथियां शरीर में दर्द एवं तेज बुखार, आँखों का लाल होना तथा गिल्टी का निकलना
डिप्थीरिया कोर्नी वैक्ट्रियम गला गलशोथ, श्वांस लेने में दिक्कत
कोढ़ माइक्रोबैक्टीरियम लेप्र तंत्रिका तंत्र अंगुलियों का कट-कट कर गिरना, शरीर पर दाग
टाइफायड टाइफी सालमोनेल आंत बुखार का तीव्र गति से चढऩा, पेट में दिक्कत और बदहजमी
टिटेनस क्लोस्टेडियम टिटोनाई मेरुरज्जु मांसपेशियों में संकुचन एवं शरीर का बेडौल होना
सुजाक नाइजेरिया गोनोरी प्रजनन अंग जेनिटल ट्रैक्ट में शोथ एवं घाव, मूत्र त्याग में परेशानी
सिफलिस ट्रिपोनेमा पैडेडम प्रजनन अंग जेनिटल ट्रैक्ट में शोथ एवं घाव, मूत्र त्याग में परेशानी
मेनिनजाइटिस ट्रिपोनेमा पैडेडम मस्तिष्क सरदर्द, बुखार, उल्टी एवं बेहोशी
इंफ्लूएंजा फिफर्स वैसिलस श्वसन तंत्र नाक से पानी आना, सिरदर्द, आँखों में दर्द
ट्रैकोमा बैक्टीरिया आँख सरदर्द, आँख दर्द
राइनाटिस एलजेनटस नाक नाक का बंद होना, सरदर्द
स्कारलेट ज्वर बैक्टीरिया श्वसन तंत्र बुखार
वायरस से होने वाले रोग
रोग का नाम प्रभावित अंग लक्षण
गलसुआ पेरोटिड लार ग्रन्थियां लार ग्रन्थियों में सूजन, अग्न्याशय, अण्डाशय और वृषण में सूजन, बुखार, सिरदर्द। इस रोग से बांझपन होने का खतरा रहता है।
फ्लू या एंफ्लूएंजा श्वसन तंत्र बुखार, शरीर में पीड़ा, सिरदर्द, जुकाम, खांसी
रेबीज या हाइड्रोफोबिया तंत्रिका तंत्र बुखार, शरीर में पीड़ा, पानी से भय, मांसपेशियों तथा श्वसन तंत्र में लकवा, बेहोशी, बेचैनी। यह एक घातक रोग है।
खसरा पूरा शरीर बुखार, पीड़ा, पूरे शरीर में खुजली, आँखों में जलन, आँख और नाक से द्रव का बहना
चेचक पूरा शरीर विशेष रूप से चेहरा व हाथ-पैर बुखार, पीड़ा, जलन व बेचैनी, पूरे शरीर में फफोले
पोलियो तंत्रिका तंत्र मांसपेशियों के संकुचन में अवरोध तथा हाथ-पैर में लकवा
हार्पीज त्वचा, श्लष्मकला त्वचा में जलन, बेचैनी, शरीर पर फोड़े
इन्सेफलाइटिस तंत्रिका तंत्र बुखार, बेचैनी, दृष्टि दोष, अनिद्रा, बेहोशी। यह एक घातक रोग है
Comments
Post a Comment