भारत के राष्ट्रपति 👉🏻 सर्व प्रथम राष्ट्रपति -डां राजेन्द्र प्रसाद,(26 JAN 1950 to 13 MAY 1962) 👉🏻 दूसरा - डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन,( 13 MAY 1962 to 13 MAY 1967) 👉🏻 तीसरा-डाॅ जाकिर हुसैन,(13 MAY 1967 to 3 MAY 1969) 👉🏻 चौथा-वराहगिरी वेंकट गिरि,(24 AUG 1969 to 24 AUG 1974) 👉🏻 पाॅचवां-डाॅ फखरुद्दीन अली अहमद,(24 AUG 1974 to 11 FEB 1977) 👉🏻 छठा- नीलम संजीव रेड्डी,(25 JULY 1977 to 25 JULY 1982) 👉🏻 साॅतवाॅ - ज्ञानी जैल सिंह,(25 JULY 1982 to 25 JULY 1987) 👉🏻 आठवाॅ - आर वैंकटरमण ,(25 JULY 1987 to 25 JULY 1992) 👉🏻 नंवा- डाॅ शंकर दयाल शर्मा,(25 JULY 1992 to 25 JULY 1997) 👉🏻 दसवाॅ- के आर नारायणन,(25 JULY 1997 to 25 JULY 2002) 👉🏻 ग्यारवा- एपीजे अब्दुल कलाम,(25 JULY 2002 to 25 JULY 2007) 👉🏻 बांरवा- प्रतीभा पाटिल,(25 JULY 2007 to 25 JULY 2012) 👉🏻 तेरवीं- प्रणव मुखर्जी,(25 JULY 2012 to 25 JULY 2017) 👉🏻 चौदवीं- रामनाथ कोविन्द(25 JULY 2017 to अब तक)
Indian Politics
मुस्लिम लीग
मुस्लिम लीग का मूल नाम 'अखिल भारतीय मुस्लिम लीग' था। यह एक राजनीतिक समूह था, जिसने ब्रिटिश भारत के विभाजन (1947 ई.) से निर्मित एक अलग मुस्लिम राष्ट्र के लिए आन्दोलन चलाया। मुस्लिम नेताओं, विशेषकर मुहम्मद अली जिन्ना ने इस बात का भय जताया कि स्वतंत्र होने पर भारत में सिर्फ़ हिन्दुओं का ही वर्चस्व रहेगा। इसीलिए उन्होंने मुस्लिमों के लिए अलग से एक राष्ट्र की मांग को बार-बार दुहराया।
लीग की स्थापना
लीग की स्थापना
1 अक्टूबर, 1906 ई. को एच.एच. आगा ख़ाँ के नेतृत्व में मुस्लिमों का एक दल वायसराय लॉर्ड मिण्टो से शिमला में मिला। अलीगढ़ कॉलेज के प्रिंसपल आर्चबोल्ड इस प्रतिनिधिमण्डल के जनक थे। इस प्रतिनिधिमण्डल ने वायसराय से अनुरोध किया कि प्रान्तीय, केन्द्रीय व स्थानीय निर्वाचन हेतु मुस्लिमों के लिए पृथक साम्प्रादायिक निर्वाचन की व्यवस्था की जाय। इस शिष्टमण्डल को भेजने के पीछे अंग्रेज़ उच्च अधिकारियों का हाथ था। मिण्टो ने इनकी मांगो का पूर्ण समर्थन किया। जिसके फलस्वरूप मुस्लिम नेताओं ने ढाका के नवाब सलीमुल्ला के नेतृत्व में 30 दिसम्बर, 1906 ई. को ढाका में 'मुस्लिम लीग' की स्थापना की।
सलीमुल्ला ख़ाँ 'मुस्लिम लीग' के संस्थापक व अध्यक्ष थे, जबकि प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता मुश्ताक हुसैन ने की। इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य था- 'भारतीय मुस्लिमों में ब्रिटिश सरकार के प्रति भक्ति उत्पत्र करना व भारतीय मुस्लिमों के राजनीतिक व अन्य अधिकारो की रक्षा करना।' 'मुस्लिम लीग' ने अपने अमृतसर के अधिवेशन में मुस्लिमों के पृथक निर्वाचक मण्डल की मांग की, जो 1909 ई. में मार्ले-मिण्टो सुधारों के द्वारा प्रदान कर दिया गया। लीग ने 1916 ई. के 'लखनऊ समझौते' के आधार पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन करने के अतिरिक्त कभी भी भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों की मांग नहीं की।
संगठन की अक्षमता
संगठन की अक्षमता
मुहम्मद अली जिन्ना तथा 'मुस्लिम लीग' ने ब्रिटिश भारत को हिन्दू व मुस्लिम राष्ट्रों में विभाजित करने की माँग वाले आन्दोलन का नेतृत्व किया और 1947 ई. में पाकिस्तान के गठन के बाद लीग पाकिस्तान का प्रमुख राजनीतिक दल बन गई। इसी साल इसका नाम बदलकर 'ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग' कर दिया गया, लेकिन पाकिस्तान में आधुनिक राजनीतिक दल के रूप में लीग उतने कारगर ढंग से काम नहीं कर सकी, जैसा यह ब्रिटिश भारत में जनआधारित दबाव गुट के रूप में काम करती थी और इस तरह से धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता व संगठन की क्षमता घटती चली गई। 1954 ई. के चुनावों में 'मुस्लिम लीग' ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में सत्ता खो दी और इसके तुरन्त बाद ही पार्टी ने 'पश्चिमी पाकिस्तान (वर्तमान पाकिस्तान)' में भी सत्ता खो दी। 1960 के दशक के अन्त में पार्टी विभिन्न गुटों में बँट गई और 1970 ई. के दशक तक यह पूरी तरह से ग़ायब हो चुकी थी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) अथवा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (संक्षिप्त: माकपा) भारत का एक साम्यवादी दल है । इस दल की स्थापना 1964 में हुई थी । इस दल का महासचिव प्रकाश करात है । यह दल लोक लेहर का प्रकाशन करता है ।
2004 के संसदीय चुनाव में इस दल को 22,061,677 मत (5.7%, 43 सीटें) मिले।
इस दल का युवा संगठन भारत कि जनवादी नौजवन सभा है।
इस दल का युवा संगठन भारत कि जनवादी नौजवन सभा है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई.) एक 'भारतीय साम्यवादी दल' है, जिसकी स्थापना 26 दिसम्बर, 1925 ई. को कानपुर में की गई थी। वर्ष 1920 ईं. में मानवेन्द्र नाथ राय एवं उनके कुछ अन्य सहयोगियों ने 'साम्यवादी दल' बनाने की घोषणा की थी। एस. पी. घाटे इस दल के महामंत्री नियुक्त किये गए थे। एम. एन. राय की सलाह से कम्युनिस्ट पार्टी को 'कम्युनिस्ट इण्टरनेशनल' की शाखा मान लिया गया और वर्ष 1928 ई. में कम्युनिस्ट इण्टरनेशनल ने ही भारत में कम्युनिस्ट पार्टी की कार्य प्रणाली निश्चित की।
1. 'पेशावर षड़यंत्र केस' (1922-1923 ई.) से सम्बन्धित होने के कारण साम्यवादी दल के सदस्य काफ़ी चर्चित रहे थे। इस केस से सम्बन्धित मुकदमों के लिए कांग्रेस ने 'केन्द्रीय सुरक्षा समिति' का गठन किया। इन मुकदमों की सुनवाई के लिए जवाहरलाल नेहरू, कैलाश नाथ काटजू एवं डॉक्टर एफ. एच. अंसारी को प्रतिवादियों की ओर से प्रस्तुत किया गया।
2. 1934 ई. तक साम्यवादी दल ने अपने आन्दोलनों के द्वारा भारत में काफ़ी प्रसिद्ध प्राप्त कर ली।
3. जुलाई, 1934 ई. में ब्रिटिश भारत की सरकार ने इसके विस्तार को देखते हुए साम्यवादी दल पर प्रतिबन्ध लगा दिया।
4. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के नेता आंदोलन में कांग्रेसी नेताओं के साथ थे, लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इस दल के नेताओं ने अंग्रेज़ों का साथ दिया।
5. दिसम्बर 1945 में कांग्रेस ने सभी साम्यवादी नेताओं को अपने दल से निकाल दिया।
6. जब भारत के संविधान को अंगीकार कर लिया गया, तब इस दल ने इसे दासता का घोषणा पत्र कहा।
7. इस दल का प्रभाव केरल, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा में मुख्य रूप से है। दल में समय-समय पर कई विभाजन हुए हैं।
2. 1934 ई. तक साम्यवादी दल ने अपने आन्दोलनों के द्वारा भारत में काफ़ी प्रसिद्ध प्राप्त कर ली।
3. जुलाई, 1934 ई. में ब्रिटिश भारत की सरकार ने इसके विस्तार को देखते हुए साम्यवादी दल पर प्रतिबन्ध लगा दिया।
4. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के नेता आंदोलन में कांग्रेसी नेताओं के साथ थे, लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इस दल के नेताओं ने अंग्रेज़ों का साथ दिया।
5. दिसम्बर 1945 में कांग्रेस ने सभी साम्यवादी नेताओं को अपने दल से निकाल दिया।
6. जब भारत के संविधान को अंगीकार कर लिया गया, तब इस दल ने इसे दासता का घोषणा पत्र कहा।
7. इस दल का प्रभाव केरल, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा में मुख्य रूप से है। दल में समय-समय पर कई विभाजन हुए हैं।
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