भारत के राष्ट्रपति 👉🏻 सर्व प्रथम राष्ट्रपति -डां राजेन्द्र प्रसाद,(26 JAN 1950 to 13 MAY 1962) 👉🏻 दूसरा - डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन,( 13 MAY 1962 to 13 MAY 1967) 👉🏻 तीसरा-डाॅ जाकिर हुसैन,(13 MAY 1967 to 3 MAY 1969) 👉🏻 चौथा-वराहगिरी वेंकट गिरि,(24 AUG 1969 to 24 AUG 1974) 👉🏻 पाॅचवां-डाॅ फखरुद्दीन अली अहमद,(24 AUG 1974 to 11 FEB 1977) 👉🏻 छठा- नीलम संजीव रेड्डी,(25 JULY 1977 to 25 JULY 1982) 👉🏻 साॅतवाॅ - ज्ञानी जैल सिंह,(25 JULY 1982 to 25 JULY 1987) 👉🏻 आठवाॅ - आर वैंकटरमण ,(25 JULY 1987 to 25 JULY 1992) 👉🏻 नंवा- डाॅ शंकर दयाल शर्मा,(25 JULY 1992 to 25 JULY 1997) 👉🏻 दसवाॅ- के आर नारायणन,(25 JULY 1997 to 25 JULY 2002) 👉🏻 ग्यारवा- एपीजे अब्दुल कलाम,(25 JULY 2002 to 25 JULY 2007) 👉🏻 बांरवा- प्रतीभा पाटिल,(25 JULY 2007 to 25 JULY 2012) 👉🏻 तेरवीं- प्रणव मुखर्जी,(25 JULY 2012 to 25 JULY 2017) 👉🏻 चौदवीं- रामनाथ कोविन्द(25 JULY 2017 to अब तक)
Indian Politics
सरकार के मंत्रालय/विभाग
सरकार में अनेक मंत्रालय/विभाग है। इनकी संख्या और प्रकार समय समय पर कारकों के अनुसार बदलते रहते हैं जैसे कि कार्य का परिमाण, विशिष्ट मदों के साथ जुड़े महत्व, अभिविन्यास में परिवर्तन, राजनैतिक शीघ्रता आदि। केन्द्र में मंत्रालयों की संख्या 15 अगस्त 1947 को 18 थी।
मंत्रालयों/विभागों की सूची (30.9.2006 के अनुसार)
कृषि मंत्रालय
कृषि और विभाग
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य योजना विभाग
रसायन और उर्वरक मंत्रालय
रसायन और पेट्रो - रासायन विभाग
उर्वरक विभाग
नागर विमान मंत्रालय
कोयला मंत्रालय
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
वाणिज्य विभाग
औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
दूरसंचार विभाग
डाक विभाग
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
उपभोक्ता मामले विभाग
खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग
नैगम कार्य मंत्रालय
संस्कृति मंत्रालय
रक्षा मंत्रालय
रक्षा विभाग
रक्षा उत्पादन और आपूर्ति विभाग
रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय
भू विज्ञान मंत्रालय
पर्यावरण और वन मंत्रालय
विदेश मंत्रालय
वित्त मंत्रालय
आर्थिक कार्य विभाग
व्यय विभाग
राजस्व विभाग
विनिवेश विभाग
वित्तीय सेवाएं विभाग
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग
आयुर्वेद, योग-प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति, यूनानी, सिद्धा और होमियोपैथी विभाग
भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय
भारी उद्योग विभाग
लोक उद्यम विभाग
गृह मंत्रालय
आंतरिक सुरक्षा विभाग
राज्य विभाग
राज्य भाषा विभाग
गृह विभाग
जम्मू तथा कश्मीर विभाग
सीमा प्रबंधन विभाग
आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
उच्चतर शिक्षा विभाग
सूचना और प्रसारण मंत्रालय
श्रम और रोजगार मंत्रालय
विधि और न्याय मंत्रालय
विधि कार्य विभाग
विधायी विभाग
न्याय विभाग
खान मंत्रालय
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
आप्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय
पंचायती राज मंत्रालय
संसदीय कार्य मंत्रालय
कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग
पेंशन और पेंशन भोगी कल्याण विभाग
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
योजना मंत्रालय
ऊर्जा मंत्रालय
रेल मंत्रालय
पोत परिवहन, सड़क परिवहन और राज मार्ग मंत्रालय
पोत परिवहन विभाग
सड़क परिवहन और राज मार्ग विभाग
ग्रामीण विकास मंत्रालय
ग्रामीण विकास विभाग
भूमि संसाधन विभाग
पेय जल पूर्ति विभाग
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग
विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान विभाग
जैव प्रौद्योगिकी विभाग
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
इस्पात मंत्रालय
वस्त्र मंत्रालय
पर्यटन मंत्रालय
जनजातीय कल्याण कार्य
शहरी विकास मंत्रालय
जल संसाधन मंत्रालय
महिला और बाल विकास मंत्रालय
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
मंत्रिमंडल सचिवालय
राष्ट्रपति सचिवालय
प्रधानमंत्री कार्यालय
योजना आयोग
कृषि और विभाग
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य योजना विभाग
रसायन और उर्वरक मंत्रालय
रसायन और पेट्रो - रासायन विभाग
उर्वरक विभाग
नागर विमान मंत्रालय
कोयला मंत्रालय
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
वाणिज्य विभाग
औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
दूरसंचार विभाग
डाक विभाग
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
उपभोक्ता मामले विभाग
खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग
नैगम कार्य मंत्रालय
संस्कृति मंत्रालय
रक्षा मंत्रालय
रक्षा विभाग
रक्षा उत्पादन और आपूर्ति विभाग
रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय
भू विज्ञान मंत्रालय
पर्यावरण और वन मंत्रालय
विदेश मंत्रालय
वित्त मंत्रालय
आर्थिक कार्य विभाग
व्यय विभाग
राजस्व विभाग
विनिवेश विभाग
वित्तीय सेवाएं विभाग
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग
आयुर्वेद, योग-प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति, यूनानी, सिद्धा और होमियोपैथी विभाग
भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय
भारी उद्योग विभाग
लोक उद्यम विभाग
गृह मंत्रालय
आंतरिक सुरक्षा विभाग
राज्य विभाग
राज्य भाषा विभाग
गृह विभाग
जम्मू तथा कश्मीर विभाग
सीमा प्रबंधन विभाग
आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
उच्चतर शिक्षा विभाग
सूचना और प्रसारण मंत्रालय
श्रम और रोजगार मंत्रालय
विधि और न्याय मंत्रालय
विधि कार्य विभाग
विधायी विभाग
न्याय विभाग
खान मंत्रालय
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
आप्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय
पंचायती राज मंत्रालय
संसदीय कार्य मंत्रालय
कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग
पेंशन और पेंशन भोगी कल्याण विभाग
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
योजना मंत्रालय
ऊर्जा मंत्रालय
रेल मंत्रालय
पोत परिवहन, सड़क परिवहन और राज मार्ग मंत्रालय
पोत परिवहन विभाग
सड़क परिवहन और राज मार्ग विभाग
ग्रामीण विकास मंत्रालय
ग्रामीण विकास विभाग
भूमि संसाधन विभाग
पेय जल पूर्ति विभाग
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग
विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान विभाग
जैव प्रौद्योगिकी विभाग
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
इस्पात मंत्रालय
वस्त्र मंत्रालय
पर्यटन मंत्रालय
जनजातीय कल्याण कार्य
शहरी विकास मंत्रालय
जल संसाधन मंत्रालय
महिला और बाल विकास मंत्रालय
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय
परमाणु ऊर्जा विभाग
अंतरिक्ष विभाग
मंत्रिमंडल सचिवालय
राष्ट्रपति सचिवालय
प्रधानमंत्री कार्यालय
योजना आयोग
परामर्श समितियां
संसदीय कार्य मंत्रालय में संसद के दोनों सदनों के सदस्यों की परामर्शी समितियां गठित की जा रही है, जिन्हें विभिन्न मंत्रालयों के साथ संलग्न किया जाता है और उनकी बैठकों की व्यवस्था की जाती है। मंत्रालय के मंत्रियों/राज्य मंत्री प्रभारियों द्वारा उस मंत्रालय की परामर्शी समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया जाता है।
इन समितियों का मुख्य प्रयोजन सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर सरकार तथा संसदीय सदस्यों के बीच अनौपचारिक चर्चा का एक मंच प्रदान करना और इनके कार्यान्वयन को आयोजित करना है। इन समितियों की बैठकें सत्र के दौरान और संसद के सत्रों की बीच की अवधि में की जाती है। 14वीं लोक सभा के गठन के बाद 32 परामर्शी समितियां विभिन्न मंत्रालयों के साथ गठित की गई थीं। इनके अलावा 16 अनौपचारिक परामर्शी समितियों का गठन 16 रेलवे क्षेत्रों के लिए भी किया गया है। मंत्रालयों के साथ संलग्नक परामर्शी समितियों के विपरीत ये अनौपचारिक समितियां केवल सत्र की अवधि के दौरान ही आयोजित की जाती हैं। 14वीं लोकसभा के गठन के बाद 31 मई 2007 तक परामर्शी समिति की 322 बैठकें आयोजित की गई थीं, जिसमें वर्ष 2006 के दौरान आयोजित 116 बैठकें शामिल हैं।
संसदीय समितियां
संसद के कार्यों में विविधता तो है, साथ ही उसके पास काम की अधिकता भी रहती है। चूंकि उसके पास समय बहुत सीमित होता है, इसलिए उसके समक्ष प्रस्तुत सभी विधायी या अन्य मामलों पर गहन विचार नहीं हो सकता है। अत: इसका बहुत-सा कार्य समितियों द्वारा किया जाता है।
संसद के दोनों सदनों की समितियों की संरचना कुछ अपवादों को छोड़कर एक जैसी होती है। इन समितियों में नियुक्ति, कार्यकाल, कार्य एवं कार्य संचालन की प्रक्रिया कुल मिलाकर करीब एक जैसी ही है और यह संविधान के अनुच्छेद 118 (1) के अंतर्गत दोनों सदनों द्वारा निर्मित नियमों के तहत अधिनियमित होती है।
सामान्यत: ये समितियां दो प्रकार की होती हैं - स्थायी समितियां और तदर्थ समितियां। स्थायी समितियां प्रतिवर्ष या समय-समय पर निर्वाचित या नियुक्त की जाती हैं और इनका कार्य कमोबेश निरंतर चलता रहा है। तदर्थ समितियों की नियुक्ति जरूरत पड़ने पर की जाती है तथा अपना काम पूरा कर लेने और अपनी रिपोर्ट पेश कर देने के बाद वे समाप्त हो जाती हैं।
स्थायी समितियां लोकसभा की स्थायी समितियों में तीन वित्तीय समितियों, यानी लोक लेखा समिति, प्राकक्लन समिति तथा सरकारी उपक्रम समिति का विशिष्ट स्थान है और ये सरकारी खर्च और निष्पादन पर लगातार नजर रखती हैं। लोक लेखा समिति तथा सरकारी उपक्रम समिति में राज्य सभा के सदस्य भी होते हैं, लेकिन प्राक्कलन समिति के सभी सदस्य लोकसभा से होती हैं।
प्राक्कलन समिति यह बताती है कि प्राक्कलनों में निहित नीति के अनुरूप क्या मितव्ययिता बरती जा सकती है तथा संगठन, कार्य कुशलता और प्रशासन में क्या-क्या सुधार किए जा सकते हैं। यह इस बात की भी जांच करती है कि धन प्राक्कलनों में निहित नीति के अनुरूप ही व्यय किया जा सकता है या नहीं। समिति इस बारे में भी सुझाव देती है कि प्राक्कलन को संसद में किस रूप में पेश किया जाए। लोक लेखा समिति भारत सरकार के विनियोग तथा वित्त लेखा और लेखा नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट की जांच करती है। यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी धन संसद के निर्णयों के अनुरूप ही खर्च हो। यह अपव्यय, हानि और निरर्थक व्यय के मामलों की ओर ध्यान दिलाती है। सरकारी उपक्रम समिति नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक की, यदि कोई रिपोर्ट हो, तो उसकी जांच करती है। वह इस बात की भी जांच करती है कि ये सरकारी उपक्रम कुशलतापूर्वक चलाए जा रहे हैं या नहीं इनका प्रबंध ठोस व्यापारिक सिद्धांतों और विवेकपूर्ण वाणिज्यिक प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।
इन तीन वित्तीय समितियों के अलावा, लोकसभा की नियमों के बारे में समिति ने विभागों से संबंधित 17 स्थायी समितियां गठित करने की सिफारिश की थी। इसके अनुसार 8 अप्रैल, 1993 को इन 17 समितियों का गठन किया गया। जुलाई 2004 में नियमों में संशोधन किया गया, ताकि ऐसी ही सात और समितियां गठित की जा सकें। इस प्रकार से इन समितियों की संख्या 24 हो गई है। इन समितियों के निम्नलिखित कार्य हैं:
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के अनुदानों की मांग पर विचार करना और उसके बारे में सदन को सूचित करना;
लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति द्वारा समिति के पास भेजे गए ऐसे विधेयकों की जांच-पड़ताल करना, और जैसा भी मामला हो, उसके बारे में रिपोर्ट तैयार करना;
मंत्रालयों और विभागों की वार्षिक रिपोर्टों पर विचार करना तथा उसकी रिपोर्ट तैयार करना; और
सदन में प्रस्तुत नीति संबंधी दस्तावेज, यदि लोकसभा के अध्यक्ष अथवा राज्य सभा के सभापति द्वारा समिति के पास भेजे गए हैं, उन पर विचार करना और जैसा भी हो, उसके बारे में रिपोर्ट तैयार करना।
प्रत्येक सदन में अन्य स्थायी समितियां, उनके कार्य के अनुसार इस प्रकार विभाजित हैं:
लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति द्वारा समिति के पास भेजे गए ऐसे विधेयकों की जांच-पड़ताल करना, और जैसा भी मामला हो, उसके बारे में रिपोर्ट तैयार करना;
मंत्रालयों और विभागों की वार्षिक रिपोर्टों पर विचार करना तथा उसकी रिपोर्ट तैयार करना; और
सदन में प्रस्तुत नीति संबंधी दस्तावेज, यदि लोकसभा के अध्यक्ष अथवा राज्य सभा के सभापति द्वारा समिति के पास भेजे गए हैं, उन पर विचार करना और जैसा भी हो, उसके बारे में रिपोर्ट तैयार करना।
प्रत्येक सदन में अन्य स्थायी समितियां, उनके कार्य के अनुसार इस प्रकार विभाजित हैं:
जांच समितियां:
याचिका समिति विधेयकों और जनहित संबंधी मामलों पर प्रस्तुत याचिकाओं की जांच करती है और केन्द्रीय विषयों पर प्राप्त प्रतिवेदनों पर विचार करती है; और
विशेषाधिकार समिति सदन या अध्यक्ष/सभापति द्वारा भेजे गए विशेषाधिकार के किसी भी मामले की जांच करती हैं;
संवीक्षण समितियां:
सरकारी आश्वासनों से संबंधी समिति मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए आश्वासनों, वादों एवं संकल्पों पर उनके कार्यान्वित होने तक नजर रखती है;
अधीनस्थ विधि निर्माण समिति इस बात की जांच करती है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त विनियमों, नियमों, उप-नियमों तथा प्रदत्त शक्तियों का प्राधिकारियों द्वारा उचित उपयोग किया जा रहा है;
पटल पर रखे गए पत्रों संबंधी समिति वैधानिक अधिसूचनाओं और आदेशों के अलावा, जो कि अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के कार्य क्षेत्र में आते हैं, मंत्रियों द्वारा सदन के पटल पर रखे गए सभी कागजातों की जांच करती है और देखती है कि संविधान, अधिनियम, नियम या विनियम के अंतर्गत कागजात प्रस्तुत करते हुए उनकी व्यवस्थाओं का पालन हुआ है या नहीं।
या नहीं।
सदन के दैनिक कार्य से संबंधित समितियां:
कार्य मंत्रणा समिति सदन में पेश किए जाने वाले सरकारी एवं अन्य कार्य के लिए समय-निर्धारण की सिफारिश करती है;
गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा प्रस्तावों संबंधी लोकसभा की समिति निजी सदस्यों द्वारा पेश गैर-सरकारी विधेयकों का वर्गीकरण एवं उनके लिए समय का निर्धारण करती है, निजी सदस्यों द्वारा पेश प्रस्तावों पर बहस के लिए समय का निर्धारण करती है और लोकसभा में निजी सदस्यों द्वारा पेश किए जाने से पूर्व संविधान संशोधन विधेयकों की जांच करती है। राज्य सभा में इस तरह की समिति नहीं होती। राज्य सभा की कार्यमंत्रणा समिति की गैर-सरकारी विधेयकों एवं प्रस्तावों के चरण या चरणों में बहस के लिए समय के निर्धारण की सिफारिश करती है।
नियम समिति सदन में कार्यविधि और कार्यवाही के संचालन से संबंधित मामलों पर विचार करती है और नियमों में संशोधन या संयोजन की सिफारिश करती है, और
सदन की बैठकों में अनुपस्थित सदस्यों संबंधी लोकसभा की समिति सदन के सदस्यों की बैठकों से अनुपस्थिति या छुट्टी के आवेदनों पर विचार करती है। राज्य सभा में इस प्रकार की कोई समिति नहीं है। सदस्यों की छुट्टी या अनुपस्थिति के आवेदनों पर सदन स्वयं विचार करता है;
अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के कल्याण की समिति इसमें दोनों सदनों के सदस्य होते हैं। यह केंद्र सरकार के कार्यक्षेत्र में आने वाली अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी मामलों पर विचार करती है और इस बात पर नजर रखती है कि उन्हें जो संवैधानिक संरक्षण दिए गए हैं, वे ठीक से कार्यान्वित हो रहे हैं या नहीं।
सदस्यों को सुविधाएं प्रदान करने संबंधी समितियां:
सामान्य प्रयोजन संबंधी समितिया सदन से संबंधित ऐसे मामलों पर विचार करती है जो किसी अन्य संसदीय समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते तथा अध्यक्ष/सभापति को इस बारे में सलाह देती है, और
आवास समिति सदस्यों के लिए आवास तथा अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करती है;
संसद सदस्यों के वेतन और भत्तों संबंधी संयुक्त समिति इस संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1954 के अंतर्गत गठित की गई है। संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन संबंधी नियम बनाने के अतिरिक्त, यह उनके चिकित्सा, आवास, टेलीफोन, डाक, निर्वाचन क्षेत्र एवं सचिवालय संबंधी सुविधाओं के संबंध में नियम बनाती है;
लाभ के पदों संबंधी संयुक्त समिति यह केंद्र राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नियुक्त समितियों एवं अन्य निकायों की संरचना और स्वरूप की जांच करती है, और यह सिफारिश करती है कि कौन - कौन से पद ऐसे हों, जो संसद के किसी भी सदन की सदस्यता के लिए किसी व्यक्ति को योग्य अथवा अयोग्य बनाते हैं;
पुस्तकालय समिति इसमें दोनों सदनों के सदस्य होते हैं। यह संसद के पुस्तकालय से संबंधित मामलों पर विचार करती है, और
महिला अधिकारिता समिति 29 अप्रैल 1997 को महिलाओं के अधिकारों के बारे में दोनों सदनों के सदस्यों की एक समिति का गठन किया गया। इसका उद्देश्य, अन्य बातों के साथ, सभी क्षेत्रों में महिलाओं को हैसियत, गरिमा और समानता प्रदान करना है।
4 मार्च 1997 को राज्य सभा की आचार संहिता समिति गठित की गई। लोकसभा की आचार-संहिता संबंधी समिति 16 मई, 2000 को गठित की गई।
तदर्थ समितियां: इस तरह की समितियां को मोटे रूप में दो शीर्षकों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है:
याचिका समिति विधेयकों और जनहित संबंधी मामलों पर प्रस्तुत याचिकाओं की जांच करती है और केन्द्रीय विषयों पर प्राप्त प्रतिवेदनों पर विचार करती है; और
विशेषाधिकार समिति सदन या अध्यक्ष/सभापति द्वारा भेजे गए विशेषाधिकार के किसी भी मामले की जांच करती हैं;
संवीक्षण समितियां:
सरकारी आश्वासनों से संबंधी समिति मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए आश्वासनों, वादों एवं संकल्पों पर उनके कार्यान्वित होने तक नजर रखती है;
अधीनस्थ विधि निर्माण समिति इस बात की जांच करती है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त विनियमों, नियमों, उप-नियमों तथा प्रदत्त शक्तियों का प्राधिकारियों द्वारा उचित उपयोग किया जा रहा है;
पटल पर रखे गए पत्रों संबंधी समिति वैधानिक अधिसूचनाओं और आदेशों के अलावा, जो कि अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के कार्य क्षेत्र में आते हैं, मंत्रियों द्वारा सदन के पटल पर रखे गए सभी कागजातों की जांच करती है और देखती है कि संविधान, अधिनियम, नियम या विनियम के अंतर्गत कागजात प्रस्तुत करते हुए उनकी व्यवस्थाओं का पालन हुआ है या नहीं।
या नहीं।
सदन के दैनिक कार्य से संबंधित समितियां:
कार्य मंत्रणा समिति सदन में पेश किए जाने वाले सरकारी एवं अन्य कार्य के लिए समय-निर्धारण की सिफारिश करती है;
गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा प्रस्तावों संबंधी लोकसभा की समिति निजी सदस्यों द्वारा पेश गैर-सरकारी विधेयकों का वर्गीकरण एवं उनके लिए समय का निर्धारण करती है, निजी सदस्यों द्वारा पेश प्रस्तावों पर बहस के लिए समय का निर्धारण करती है और लोकसभा में निजी सदस्यों द्वारा पेश किए जाने से पूर्व संविधान संशोधन विधेयकों की जांच करती है। राज्य सभा में इस तरह की समिति नहीं होती। राज्य सभा की कार्यमंत्रणा समिति की गैर-सरकारी विधेयकों एवं प्रस्तावों के चरण या चरणों में बहस के लिए समय के निर्धारण की सिफारिश करती है।
नियम समिति सदन में कार्यविधि और कार्यवाही के संचालन से संबंधित मामलों पर विचार करती है और नियमों में संशोधन या संयोजन की सिफारिश करती है, और
सदन की बैठकों में अनुपस्थित सदस्यों संबंधी लोकसभा की समिति सदन के सदस्यों की बैठकों से अनुपस्थिति या छुट्टी के आवेदनों पर विचार करती है। राज्य सभा में इस प्रकार की कोई समिति नहीं है। सदस्यों की छुट्टी या अनुपस्थिति के आवेदनों पर सदन स्वयं विचार करता है;
अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के कल्याण की समिति इसमें दोनों सदनों के सदस्य होते हैं। यह केंद्र सरकार के कार्यक्षेत्र में आने वाली अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी मामलों पर विचार करती है और इस बात पर नजर रखती है कि उन्हें जो संवैधानिक संरक्षण दिए गए हैं, वे ठीक से कार्यान्वित हो रहे हैं या नहीं।
सदस्यों को सुविधाएं प्रदान करने संबंधी समितियां:
सामान्य प्रयोजन संबंधी समितिया सदन से संबंधित ऐसे मामलों पर विचार करती है जो किसी अन्य संसदीय समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते तथा अध्यक्ष/सभापति को इस बारे में सलाह देती है, और
आवास समिति सदस्यों के लिए आवास तथा अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करती है;
संसद सदस्यों के वेतन और भत्तों संबंधी संयुक्त समिति इस संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1954 के अंतर्गत गठित की गई है। संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन संबंधी नियम बनाने के अतिरिक्त, यह उनके चिकित्सा, आवास, टेलीफोन, डाक, निर्वाचन क्षेत्र एवं सचिवालय संबंधी सुविधाओं के संबंध में नियम बनाती है;
लाभ के पदों संबंधी संयुक्त समिति यह केंद्र राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नियुक्त समितियों एवं अन्य निकायों की संरचना और स्वरूप की जांच करती है, और यह सिफारिश करती है कि कौन - कौन से पद ऐसे हों, जो संसद के किसी भी सदन की सदस्यता के लिए किसी व्यक्ति को योग्य अथवा अयोग्य बनाते हैं;
पुस्तकालय समिति इसमें दोनों सदनों के सदस्य होते हैं। यह संसद के पुस्तकालय से संबंधित मामलों पर विचार करती है, और
महिला अधिकारिता समिति 29 अप्रैल 1997 को महिलाओं के अधिकारों के बारे में दोनों सदनों के सदस्यों की एक समिति का गठन किया गया। इसका उद्देश्य, अन्य बातों के साथ, सभी क्षेत्रों में महिलाओं को हैसियत, गरिमा और समानता प्रदान करना है।
4 मार्च 1997 को राज्य सभा की आचार संहिता समिति गठित की गई। लोकसभा की आचार-संहिता संबंधी समिति 16 मई, 2000 को गठित की गई।
तदर्थ समितियां: इस तरह की समितियां को मोटे रूप में दो शीर्षकों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है:
संसद के दोनों सदनों द्वारा किसी विचाराधीन प्रस्ताव के स्वीकृत किए जाने पर समय-समय पर गठित समितियां अथवा अध्यक्ष/सभापति द्वारा कोई विशिष्ट विषय (उदाहरण के लिए-राष्ट्रपति, के अभिभाषण पर, कुछ सदस्यों के आचरण पर, कुछ सदस्यों के आचरण पर, पंचवर्षीय योजनाओं के मसौदे पर, रेलवे कनवेंशन समिति, स्थानीय क्षेत्रों के विकास की योजना से संबद्ध सांसदों की समिति, बोफोर्स ठेके पर संयुक्त समिति, उर्वरक मूल्य निर्धारण पर संयुक्त समिति और प्रतिभूति तथा बैंक भुगतानों में गड़बड़ी की जांच करने के लिए संयुक्त समिति, आदि) संसदीय परिसर की सुरक्षा संबंधी संयुक्त समिति और
विशेष विधेयकों पर विचार करने एवं रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त प्रवर एवं संयुक्त समितियां। जहां तक विधेयकों से संबंधित सवाल है, ये समितियां अन्य तदर्थ समितियों से भिन्न हैं और इनके द्वारा पालन की जाने वाली प्रक्रिया का उल्लेख अध्यक्ष/सभापति के निर्देश तथा प्रक्रिया संबंधी नियमों में किया जाता है।
विशेष विधेयकों पर विचार करने एवं रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त प्रवर एवं संयुक्त समितियां। जहां तक विधेयकों से संबंधित सवाल है, ये समितियां अन्य तदर्थ समितियों से भिन्न हैं और इनके द्वारा पालन की जाने वाली प्रक्रिया का उल्लेख अध्यक्ष/सभापति के निर्देश तथा प्रक्रिया संबंधी नियमों में किया जाता है।
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